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आईटी और डिजिटल नवाचार में आगे बढ़ता मध्यप्रदेश

आईटी और डिजिटल नवाचार में आगे बढ़ता मध्यप्रदेश

सोनिया परिहार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, आईटी और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में मध्यप्रदेश हर दिन नए आयाम स्थापित कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए, प्रदेश ने अपने शासकीय विभागों और नागरिकों के लिए तकनीकी प्रगति और डिजिटल सुविधाओं का ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। राज्य डिजिटल भारत के सपने को साकार करते हुये डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। इसमें मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रोनिक विकास निगम (एमपीएसईडीसी) और मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

म.प्र. में विकसित सॉफ्टवेयर ने देश में बनाई पहचान:मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) की अगुवाई में प्रदेश ने डिजिटल प्रौद्योगिकी में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। संपदा 2.0 और साइबर तहसील जैसे प्लेटफॉर्म नागरिक सेवाओं को सरल बना रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। संपदा 2.0 ने संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर ई-पंजीकरण, ई-स्टाम्प, स्टाम्प शुल्क की गणना और दस्तावेज़ खोज जैसे कार्यों को घर बैठे संभव बनाया गया है। साइबर तहसील ने राजस्व न्यायालयों की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुव्यवस्थित करते हुए भ्रष्टाचार को कम करने और जनता को त्वरित सेवाएं प्रदान करने का सफल प्रयास किया गया है।

निवेश और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन:सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाएँ (आईटीईएस), इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) और डेटा केंद्रों की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, राज्य में दूरदर्शी “आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश प्रोत्साहन नीति 2023” बनाई गई है। राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए यह नीति डिज़ाइन की गई है। जबलपुर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पॉलिसी के दिशा निर्देश लॉन्च किए थे। नीति में निवेशकों को वित्तीय और गैरवित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रावधान किए गए है। सभी वित्तीय सहायता, आवश्यक अनुमतियाँ, अनुमोदनों, आवेदनों और किसी भी अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के लिए पूर्ण रूप से डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया गया है। राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के लिये प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप नीति-2022 लागू है।

राज्य में एवीजीसी नीति-2024 भी लागू की जा रही है, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खुला है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा आदि को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (त्रष्टष्ट) नीति 2024 भी तैयार की गई है। विकसित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर:वर्तमान में प्रदेश में 2 हजार से अधिक आईटी/आईटीईएस एवं ईएसडीएम इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें एमपीएसईडीसी में पंजीकृत 650 इकाइयां हैं, जिन्हें राज्य की नीतियों का लाभ मिला है। इन इकाइयों का टर्न ओवर 10 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष से अधिक है। देश की 50 से अधिक बड़ी आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां मध्यप्रदेश में स्थापित हैं। प्रदेश से हर वर्ष 500 मिलियन डॉलर का निर्यात आईटी से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से होता है। राज्य में 5 आईटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं। राज्य सरकार द्वारा 15 आईटी पार्क बनाए गए हैं, जिनसे डेढ़ लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। राज्य में 1200 से अधिक तकनीकी स्टार्ट-अप स्थापित हैं, जिनमें से दो “नीव क्लाउड और शॉप किराना” यूनिकॉर्न कंपनी हैं।

आईटी/आईटीएस/ईएसडीएम और डेटा सेंटर क्षेत्र में बढ़ता निवेश:राज्य में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव और इंटरैक्टिव सेशन में आईटी/आईटीएस/ईएसडीएम और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेशकों ने विशेष उत्साह दिखाया। इस क्षेत्र में निवेश से रोजगार से नए अवसर सृजित होंगे। सागर में 1700 करोड़ से अधिक निवेश से डेटा स्थापित किया जा रहा है। बेंगलुरु में आयोजित इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट के दौरान, एमपीएसईडीसी ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर संघ,, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसोसिएशन ऑफ जिओस्पेशल इंडस्ट्रीज और टाई ग्लोबल जैसे प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उद्योग संघों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। जबलपुर, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु में कई बड़ी कंपनियों से करोड़ों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यूके-जर्मनी से एसआरएएम-एमआरएएम ग्रुप द्वारा 25000 करोड़ रूपये निवेश से सेमी कंडक्टर और साइंस टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ।

जीआईएस तकनीक का बढ़ता उपयोग:राज्य में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक का भी व्यापक उपयोग हो रहा है। 5त्र के लिए योजना, अनुमोदन और जीआईएस आधारित सेवाएं प्रदान करने के लिए “गति-शक्ति संचार पोर्टल” विकसित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए सर्वेक्षण, निगरानी और कार्यान्वयन के लिए “जल रेखा” जैसे पोर्टल कार्य कर रहे है। जीआईएस द्वारा तैयार किये गये लोकपथ मोबाइल ऐप और वेब एप्लिकेशन से पूरे राज्य में सडक़ों से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने एवं उनके निराकरण को मॉनिटर करने की सुविधा दी जा रही है। शोध और शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय:मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के अंतर्गत राज्य में विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उज्जैन तारामंडल में 3डी-4्य प्रोजेक्शन सिस्टम का अपग्रेडेशन और वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला डोंगला का ऑटोमेशन इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं।

प्रशासनिक डिजिटलीकरण और पारदर्शिता:सरकार ने ई-एचआरएमएस पोर्टल और अन्य डिजिटल मंचों के जरिए मानव संसाधन और सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटाइज्ड किया है। मुख्यमंत्री प्रगति पोर्टल ने विभिन्न योजनाओं और निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग को सुगम बनाया है। आईटी क्षेत्र में विगत एक वर्ष में प्राप्त उपलब्धियों ने डिजिटल प्रौद्योगिकी से प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई है और नागरिकों के जीवन को भी सरल और सुविधाजनक बनाया है। इन नवाचारों ने राज्य को आईटी निवेशकों के लिए एक आदर्श स्थान बना दिया है। प्रदेश डिजिटल भारत के सपने को साकार करते हुये वैश्विक आईटी मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।

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