Breaking News
मानकों के विपरीत संचालित 96 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त
मानकों के विपरीत संचालित 96 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त
​शिक्षा के मंदिर में अनैतिक गतिविधियां अक्षम्य, दोषियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई: कुसुम कंडवाल
​शिक्षा के मंदिर में अनैतिक गतिविधियां अक्षम्य, दोषियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई: कुसुम कंडवाल
सीएम धामी के निर्देशों के बाद एमडीडीए ने शुरू की ‘तेल बचाओ मुहिम’, कार पूलिंग और ऊर्जा संरक्षण पर जोर
सीएम धामी के निर्देशों के बाद एमडीडीए ने शुरू की ‘तेल बचाओ मुहिम’, कार पूलिंग और ऊर्जा संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने 307 नव नियुक्त अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री धामी ने 307 नव नियुक्त अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र
महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में एडमिशन का एक मौका और मिलेगा- रेखा आर्या
महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में एडमिशन का एक मौका और मिलेगा- रेखा आर्या
चारधाम यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, 25 दिनों में 12.60 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
चारधाम यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, 25 दिनों में 12.60 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
जवाड़ी पुल के पास गहरी खाई में गिरी कार, SDRF ने समय रहते बचाई दो जिंदगियां
जवाड़ी पुल के पास गहरी खाई में गिरी कार, SDRF ने समय रहते बचाई दो जिंदगियां
ऋषिकेश में एमडीडीए का बड़ा अभियान, आठ अवैध बहुमंजिला भवन सील
ऋषिकेश में एमडीडीए का बड़ा अभियान, आठ अवैध बहुमंजिला भवन सील
ईंधन बचत पर धामी सरकार सख्त, सरकारी वाहनों में 50% EV अनिवार्य
ईंधन बचत पर धामी सरकार सख्त, सरकारी वाहनों में 50% EV अनिवार्य

कोई राज्य हाईवे कैसे बंद कर सकता है

कोई राज्य हाईवे कैसे बंद कर सकता है

सर्वोच्च अदालत ने हरियाणा सरकार से अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर लगाए अवरोधक हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने राजमार्ग को अवरुद्ध करने के अधिकार पर भी प्रश्न उठाए। कोई राज्य हाईवे को कैसे बंद कर सकता है। यातायात नियंत्रित करने को उसका दायित्व बताते हुए अदालत ने कहा कि किसान भी देश के नागरिक हैं। उन्हें खाना दीजिए, चिकित्सकीय देखभाल कीजिए। पीठ ने कहा वे आएंगे, नारे लगाएंगे, वापस चले जाएंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा, किसान मजदूर मोर्चा द्वारा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली चलो की घोषणा के बाद हरियाणा सरकार ने फरवरी में अंबाला-नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग में बैरीकेड्स लगा दिए थे।

शीर्ष अदालत हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। जैसा कि फरवरी में प्रदर्शनकारी किसानों और हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों के दरम्यान हुई झड़प में हुई किसान की मौत की जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पैनल गठित करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार का कहना है कि 400-500 किसान पंजाब की तरफ बैठे हैं।

सबसे बड़ी अदालत की नाराजगी उस यातायात अव्यवस्था के कारण है, जिससे जनता को हर रोज जूझना पड़ता है। इस पर हैरत नहीं होती कि सरकारें किस बेरुखी से व्यस्त सडक़ों पर अवरोधक लगाने के आदेश जारी कर देती हैं। पांच महीनों से ऐसी सडक़ को बाधित रखना, जिसका प्रयोग ढेरों लोग नियमित तौर पर करते हैं।

यहां तो किसानों के उग्र आंदोलन की दलील दी जा सकती है जबकि देखने में आता है कि राजनेताओं की सुविधा और उनके कार्यक्रमों के मद्देनजर देश भर में अवरोधकों के धड़ल्ले से उपयोग होते रहते हैं। अदालतों की कड़ी टिप्पणियों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती।
सरकारी आदेशों या नियमों के विरोध का हक नागरिकों से छीना नहीं जा सकता। उन्हें काबू में रखने के तरीके मानवीय और व्यावहारिक भी हो सकते हैं। बात नाराज किसानों की ही नहीं है, बल्कि सडक़ को लंबे समय तक बंद रखने और वैकल्पिक व्यवस्था देने में कोताही की भी है। उम्मीद की जानी चाहिए अदालत के इस आदेश से सरकारें सीख लेंगी और भविष्य में अवरोधकों का बेजा प्रयोग थम जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top