Breaking News
‘डकैत’ की रिलीज टली, अब फिल्म 10 अप्रैल को देगी सिनेमाघरों में दस्तक
‘डकैत’ की रिलीज टली, अब फिल्म 10 अप्रैल को देगी सिनेमाघरों में दस्तक
भराड़ीसैंण में मोर्निंग वाक पर निकले सीएम धामी, स्थानीय लोगों के साथ लिया चाय की चुस्कियों का आनन्द
भराड़ीसैंण में मोर्निंग वाक पर निकले सीएम धामी, स्थानीय लोगों के साथ लिया चाय की चुस्कियों का आनन्द
22 साल बाद भारत को मिली अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी
22 साल बाद भारत को मिली अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी
नन्दादेवी राजजात के लिए 109.65 करोड़ स्वीकृत- महाराज
नन्दादेवी राजजात के लिए 109.65 करोड़ स्वीकृत- महाराज
धौरण रोड पर अवैध “हेल्पिंग हेल्थ” हॉस्पिटल पर एमडीडीए की सख्त कार्रवाई
धौरण रोड पर अवैध “हेल्पिंग हेल्थ” हॉस्पिटल पर एमडीडीए की सख्त कार्रवाई
गैस संकट के बीच कमर्शियल सिलेंडरों की सामान्य सप्लाई पर रोक
गैस संकट के बीच कमर्शियल सिलेंडरों की सामान्य सप्लाई पर रोक
बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण व पुननिर्माण किया गया- महाराज
बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण व पुननिर्माण किया गया- महाराज
बदलती जीवनशैली और अनियमित खान-पान से बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
बदलती जीवनशैली और अनियमित खान-पान से बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
पौड़ी के जामलाखाल क्षेत्र में गुलदार के हमले से एक व्यक्ति की मौत
पौड़ी के जामलाखाल क्षेत्र में गुलदार के हमले से एक व्यक्ति की मौत

जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

9 फरवरी 2027 तक रहेगी जस्टिस सूर्यकांत की कार्यकाल अवधि

नई दिल्ली। हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गांव में साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से उठकर अपने सपनों को मुकाम तक पहुंचाने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस औपचारिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ गणमान्य मौजूद रहे। नए CJI की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 30 अक्टूबर 2025 को अनुमोदित की गई थी, जिसके बाद आज वे आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण कर चुके हैं। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।

संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत, सेवानिवृत्ति से पूर्व CJI बी.आर. गवई ने सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत के नाम की अनुशंसा की थी। लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, वरिष्ठता के आधार पर उन्हें अगला मुख्य न्यायाधीश चुना गया। पूर्व CJI बी.आर. गवई 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने के कारण पद से सेवानिवृत्त हुए। विदाई से पूर्व उन्होंने औपचारिक रूप से नए CJI को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिससे न्यायपालिका में नेतृत्व का सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित हुआ।

साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर

10 फरवरी 1962 को हिसार के पेटवाड़ गांव में जन्मे सूर्यकांत के पिता मदनगोपाल शास्त्री संस्कृत शिक्षक थे और माता शशि देवी गृहिणी। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे सूर्यकांत ने सीमित परिस्थितियों में शिक्षा पाई। पिता चाहते थे कि वे एलएलएम करें, लेकिन उन्होंने एलएलबी के बाद ही पेशेवर जीवन शुरू करने का फैसला लिया। उनके भाई-बहनों में से अधिकांश शिक्षण और चिकित्सा सेवा से जुड़े रहे।

कानूनी करियर की शुरुआत और विकास

सूर्यकांत ने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री ली। 1984 में हिसार जिला अदालत से वकालत की शुरुआत करने के बाद वे 1985 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने चंडीगढ़ चले गए। न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर भी पूरा किया।

सिर्फ 38 वर्ष की उम्र में, 7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने। 2004 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने और 14 वर्ष तक वहां सेवाएं देने के बाद 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।

महत्वपूर्ण फैसलों में निभाई अहम भूमिका

अपने न्यायिक कार्यकाल में जस्टिस सूर्यकांत कई बड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जिनमें शामिल हैं—

बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चुनाव आयोग से ब्योरा सार्वजनिक कराने का निर्देश।

अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र के फैसले को सही ठहराने वाली संविधान पीठ का हिस्सा।

वन रैंक वन पेंशन (OROP) को संवैधानिक वैधता प्रदान करने और सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए समान अवसर का समर्थन।

असम से जुड़े नागरिकता विवाद पर धारा 6A की वैधता को मंजूरी देने वाली पीठ में सहभागिता।

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य, हालांकि गिरफ्तारी को उचित माना।

परिवार और निजी जीवन

1980 में उनकी शादी सविता शर्मा से हुई, जो शिक्षिका रहीं और बाद में कॉलेज की प्रिंसिपल बनीं। उनकी दोनों बेटियां कानून में मास्टर्स कर रही हैं और पिता के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं।

कविता, पर्यावरण और पत्रकारिता से लगाव

न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपनी कानूनी पहचान के साथ ही संवेदनशील कवि भी हैं। कॉलेज के दिनों में उनकी कविता ‘मेंढ पर मिट्टी चढ़ा दो’ काफी चर्चित रही। वे पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय रहते हैं—गांव के एक पुराने तालाब के पुनर्जीवन के लिए उन्होंने निजी धन से योगदान दिया और आसपास पौधरोपण भी कराया।

त्रकारिता में विशेष रुचि रखते हुए वे मामलों की गहराई तक जांच करने को महत्व देते हैं और इसी जुनून के चलते उन्होंने 1988 में ‘Administrative Geography of India’ पुस्तक भी लिखी।

विवादों में भी आया नाम

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए उन पर कुछ गंभीर आरोप लगे—2012 में एक रियल एस्टेट एजेंट ने आर्थिक लेन-देन का आरोप लगाया और 2017 में एक कैदी ने जमानत के लिए रिश्वत लेने की शिकायत की। हालांकि, इनमें से कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हो सका।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top