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बागेश्वर अस्पताल प्रकरण : जांच समिति की रिपोर्ट पर भड़के स्वास्थ्य सचिव

बागेश्वर अस्पताल प्रकरण : जांच समिति की रिपोर्ट पर भड़के स्वास्थ्य सचिव

जवाब दो—जांच समिति और डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस

सिस्टम की चूक पर जताई नाराज़गी, जिलाधिकारी को सौंपी विस्तृत जांच

न लापरवाही बर्दाश्त होगी, न रिपोर्टिंग में लीपापोती– स्वास्थ्य सचिव

देहरादून/बागेश्वर। उत्तराखंड में एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक को झकझोर दिया है। गढ़वाल-कुमाऊं के ग्वालदम, बैजनाथ, बागेश्वर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी तक उस बच्चे को लेकर परिवार दौड़ा लेकिन डॉक्टर उसका जीवन नहीं बचा सके।इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट किया, “बागेश्वर में एक मासूम बच्चे की चिकित्सा में लापरवाही से मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है। जैसा कि अभी तक सूचना प्राप्त हुई है, उनसे प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कतिपय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती गई है।”

इस दुखद मृत्यु पर प्रदेश सरकार ने संज्ञान तो लिया, लेकिन जांच समिति की रिपोर्ट पर खुद स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने असंतोष जताया है। रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं के गायब रहने पर सचिव ने सख्त नाराज़गी जताते हुए इसे “अपूर्ण व असंतोषजनक” करार दिया है। डॉ. आर राजेश कुमार ने जिलाधिकारी बागेश्वर को विस्तृत और निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपते हुए यह साफ कर दिया है कि अब लापरवाही की परतें जिलास्तर पर खोली जाएंगी और सच सामने लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंपी। लेकिन सचिव डॉ. राजेश कुमार ने रिपोर्ट की समीक्षा के बाद पाया कि—

मरीज की तत्कालिक हालत का उल्लेख नहीं
परिजनों के बयान गायब
रेफरल से पूर्व की गई चिकित्सा प्रक्रिया अधूरी
चिकित्सकीय निर्णयों का कोई ठोस आधार नहीं
सचिव ने इन कमियों को “तथ्यों की अनदेखी और प्रक्रिया की अवहेलना” बताया है।

जवाब दो— जांच समिति और डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस

स्वास्थ्य सचिव ने रिपोर्ट को अधूरी और एकतरफा मानते हुए तीनों जांच अधिकारियों— डॉ. तपन शर्मा, डॉ. अनुपमा हयांकी और डॉ. प्रमोद जंगपांगी— सहित संबंधित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकिंत कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी से सात दिन में संतोषजनक स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अब जिलाधिकारी करेंगे नए सिरे से जांच

प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए सचिव ने अब जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को सौंपी है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि दोषियों की पहचान और प्रक्रियागत खामियों की पूरी पड़ताल करें। साथ ही, राज्य स्तर पर स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

“न लापरवाही बर्दाश्त होगी, न रिपोर्टिंग में लीपापोती” – स्वास्थ्य सचिव

डॉ. राजेश कुमार ने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवाओं में न तो लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी, न ही लीपापोती। उन्होंने स्पष्ट किया कि “अब ज़िम्मेदारी तय की जाएगी और भविष्य के लिए व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाएगा।”

बागेश्वर की यह घटना सिर्फ एक बालक की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर तमाचा है जो समय पर जांच, इलाज और जवाबदेही देने में बार-बार नाकाम हो रहा है। स्वास्थ्य सचिव की तल्ख़ प्रतिक्रिया एक संकेत है कि शायद अब विभाग को आईना दिखाने का वक्त आ गया है। सवाल यह भी है कि क्या यही रवैया हर मामले में अपनाया जाएगा… या फिर ये भी एक रिपोर्ट फाइल में दफ़्न होकर रह जाएगी?

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