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इन लोगों को ज्यादा कुट्टू का आटा खाना पड़ सकता है भारी, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

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चैत्र नवरात्रि के दौरान जहां एक ओर भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं, वहीं खान-पान में भी खास बदलाव देखने को मिलता है। व्रत के दिनों में कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी, पकौड़ी और पराठे लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर और ग्लूटेन-फ्री होने के कारण इसे हेल्दी विकल्प माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इसका अधिक या गलत सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुट्टू का आटा हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। खासकर कुछ लोगों को इसे खाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं किन लोगों को कुट्टू के आटे का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

कमजोर पाचन वाले लोगों को सावधानी
कुट्टू का आटा फाइबर से भरपूर होता है, लेकिन जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उनके लिए यह भारी पड़ सकता है। ज्यादा सेवन से गैस, पेट फूलना, एसिडिटी या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में हल्के और कम तले हुए रूप में इसका सेवन करना बेहतर माना जाता है।

लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए जोखिम
विशेषज्ञ बताते हैं कि कुट्टू का आटा शरीर में ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकता है। लो बीपी के मरीजों को इसका ज्यादा सेवन करने पर चक्कर, कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

डायबिटीज मरीजों को मात्रा पर ध्यान
कुट्टू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, लेकिन जब इसे ज्यादा तेल में तलकर खाया जाता है, तो यह ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकता है। डायबिटीज के मरीजों को इसे रोटी, चीला या उबले रूप में सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

तली-भुनी चीजों से बढ़ सकता है खतरा
व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से बनी तली हुई चीजों का ज्यादा सेवन कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के साथ-साथ वजन और दिल से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा सकता है। खासकर हार्ट पेशेंट और मोटापे से जूझ रहे लोगों को इससे बचना चाहिए।

संतुलित आहार है जरूरी
विशेषज्ञों की सलाह है कि व्रत के दौरान सिर्फ एक ही तरह का भोजन बार-बार न खाएं। फल, दूध, दही, मेवे और हल्का आहार शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और कमजोरी से भी बचाव होता है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)

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