Breaking News
छह माह के लिए खुले सिद्धपीठ लाटू देवता के द्वार, परंपराओं के साथ हुआ आयोजन
छह माह के लिए खुले सिद्धपीठ लाटू देवता के द्वार, परंपराओं के साथ हुआ आयोजन
सीएम धामी ने श्री पीठम स्थापना महोत्सव में 1100 कन्याओं का पूजन व माँ राजेश्वरी का किया अभिषेक
सीएम धामी ने श्री पीठम स्थापना महोत्सव में 1100 कन्याओं का पूजन व माँ राजेश्वरी का किया अभिषेक
बुजुर्ग समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर-सीएम धामी
बुजुर्ग समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर-सीएम धामी
धामी कैबिनेट की बैठक में कई प्रस्तावों पर लगी मुहर
धामी कैबिनेट की बैठक में कई प्रस्तावों पर लगी मुहर
लूट के बाद पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़, एक आरोपी ढेर, इंस्पेक्टर नरेश राठौड़ घायल
लूट के बाद पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़, एक आरोपी ढेर, इंस्पेक्टर नरेश राठौड़ घायल
अवैध निर्माणों पर एमडीडीए का सख्त अभियान जारी, सेक्टरवार टीमें सक्रिय, ध्वस्तीकरण व सीलिंग की लगातार कार्रवाई
अवैध निर्माणों पर एमडीडीए का सख्त अभियान जारी, सेक्टरवार टीमें सक्रिय, ध्वस्तीकरण व सीलिंग की लगातार कार्रवाई
जिला प्रशासन का बड़ा एक्शन: नियम तोड़ने पर 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त
जिला प्रशासन का बड़ा एक्शन: नियम तोड़ने पर 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त
अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए का सख्त एक्शन, मेहुवाला में 10 बीघा जमीन पर विकसित हो रही अवैध कॉलोनी ध्वस्त
अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए का सख्त एक्शन, मेहुवाला में 10 बीघा जमीन पर विकसित हो रही अवैध कॉलोनी ध्वस्त
चारधाम यात्रा पर राजनीति न करें- सीएम धामी
चारधाम यात्रा पर राजनीति न करें- सीएम धामी

कानून का भय ही नहीं

कानून का भय ही नहीं

आखिर देश में कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का यह हाल क्यों हो गया है कि एक कंपनी उसकी तनिक परवाह नहीं करती? क्या इसका कारण गुजरे वर्षों में हुई बड़ी परिघटनाएं नहीं हैं, जिनमें कानून के राज की धज्जियां उड़ाई गई हैं? सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही इस वजह से शुरू की है कि इस कंपनी ने उसके पहले के आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट ने अपनी दवाओं के बारे में मीडिया में भ्रामक विज्ञापन देने से उसे मना किया था। लेकिन कंपनी ने कोर्ट में हलफनामा देने के बावजूद उसकी परवाह नहीं की। जैसाकि कि दो जजों की पीठ ने कहा, यह कंपनी अपने इश्तहार में औषधि एवं जादू-टोना उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम-1954 का उल्लंघन कर रही है।

ऐसा खुलेआम चल रहा है और केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। न्यायालय ने इस पर आक्रोश जताया। आयुष मंत्रालय से कहा- सारे देश की आंख में धूल झोंकी गई है। और आपने अपनी आंख बंद कर रखी है। दो साल से आप इस महत्त्वपूर्ण घटना (यानी न्यायिक आदेश) का इंतजार कर रहे हैं, जबकि औषधि कानून से खुद यह स्पष्ट है कि ऐसे विज्ञापन प्रतिबंधित हैं। यह मामला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट ले गया है। अब एक बार फिर से कोर्ट ने प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रकाशन या प्रसारण पर रोक लगाने को कहा है। मगर इस क्रम में यह विचारणीय है कि आखिर देश में कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का यह हाल क्यों हो गया है कि एक कंपनी उसकी तनिक परवाह नहीं करती? क्या इसका कारण गुजरे वर्षों में हुई बड़ी परिघटनाएं नहीं हैं, जिनमें खुद सत्ता-तंत्र के ऊंचे स्तरों पर बैठे लोगों के संरक्षण में कानून के राज की धज्जियां उड़ाई गई हैं?

जब एक स्तर पर ऐसी घटना होती है और सरकार से लेकर न्यायपालिका तक उसकी परवाह नहीं करतीं, तो फिर सबको यही संदेश जाता है कि कानून सबके लिए समान नहीं है, ना ही यह सबसे ऊपर है। पतंजलि आयुर्वेद जैसी कंपनियां धन और सत्ता-तंत्र तक पहुंच के लिहाज से प्रभावशाली मानी जाती हैं। ऐसे में अगर उसके अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनादर किया, तो उसे आज के व्यापक संदर्भ में रखकर ही देखा जाएगा। उस संदर्भ में जिसमें रसूखदार लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top