Breaking News
एसजीआरआरयू में तंबाकू के खिलाफ गूंजी हुंकार, सैकड़ों युवाओं ने लिया संकल्प
एसजीआरआरयू में तंबाकू के खिलाफ गूंजी हुंकार, सैकड़ों युवाओं ने लिया संकल्प
आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा फैसिलिटेटर्स के मानदेय की धनराशि अवमुक्त : स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल
आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा फैसिलिटेटर्स के मानदेय की धनराशि अवमुक्त : स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल
बड़ी खबर : नैनीताल में दो आरोपियों पर जिला बदर की कार्रवाई, छह माह के लिए जिले से निष्कासन
बड़ी खबर : नैनीताल में दो आरोपियों पर जिला बदर की कार्रवाई, छह माह के लिए जिले से निष्कासन
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने की तीन विभागों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने की तीन विभागों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
एसआईआर कार्य में तेजी के साथ निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करें-डीएम
एसआईआर कार्य में तेजी के साथ निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करें-डीएम
सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने पीएचसी मेहूवाला का किया निरीक्षण, 15 दिन में प्रसव सेवाएं शुरू करने के निर्देश
सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने पीएचसी मेहूवाला का किया निरीक्षण, 15 दिन में प्रसव सेवाएं शुरू करने के निर्देश
कोटद्वार–देहरादून बस सेवा के लिए गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का जताया आभार
कोटद्वार–देहरादून बस सेवा के लिए गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का जताया आभार
जिला सेवायोजन विभाग के तत्वावधान में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज भीमताल में एक दिवसीय कैरियर काउंसिलिंग कार्यक्रम आयोजित
जिला सेवायोजन विभाग के तत्वावधान में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज भीमताल में एक दिवसीय कैरियर काउंसिलिंग कार्यक्रम आयोजित

कानून का भय ही नहीं

कानून का भय ही नहीं

आखिर देश में कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का यह हाल क्यों हो गया है कि एक कंपनी उसकी तनिक परवाह नहीं करती? क्या इसका कारण गुजरे वर्षों में हुई बड़ी परिघटनाएं नहीं हैं, जिनमें कानून के राज की धज्जियां उड़ाई गई हैं? सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही इस वजह से शुरू की है कि इस कंपनी ने उसके पहले के आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट ने अपनी दवाओं के बारे में मीडिया में भ्रामक विज्ञापन देने से उसे मना किया था। लेकिन कंपनी ने कोर्ट में हलफनामा देने के बावजूद उसकी परवाह नहीं की। जैसाकि कि दो जजों की पीठ ने कहा, यह कंपनी अपने इश्तहार में औषधि एवं जादू-टोना उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम-1954 का उल्लंघन कर रही है।

ऐसा खुलेआम चल रहा है और केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। न्यायालय ने इस पर आक्रोश जताया। आयुष मंत्रालय से कहा- सारे देश की आंख में धूल झोंकी गई है। और आपने अपनी आंख बंद कर रखी है। दो साल से आप इस महत्त्वपूर्ण घटना (यानी न्यायिक आदेश) का इंतजार कर रहे हैं, जबकि औषधि कानून से खुद यह स्पष्ट है कि ऐसे विज्ञापन प्रतिबंधित हैं। यह मामला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट ले गया है। अब एक बार फिर से कोर्ट ने प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों के प्रकाशन या प्रसारण पर रोक लगाने को कहा है। मगर इस क्रम में यह विचारणीय है कि आखिर देश में कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का यह हाल क्यों हो गया है कि एक कंपनी उसकी तनिक परवाह नहीं करती? क्या इसका कारण गुजरे वर्षों में हुई बड़ी परिघटनाएं नहीं हैं, जिनमें खुद सत्ता-तंत्र के ऊंचे स्तरों पर बैठे लोगों के संरक्षण में कानून के राज की धज्जियां उड़ाई गई हैं?

जब एक स्तर पर ऐसी घटना होती है और सरकार से लेकर न्यायपालिका तक उसकी परवाह नहीं करतीं, तो फिर सबको यही संदेश जाता है कि कानून सबके लिए समान नहीं है, ना ही यह सबसे ऊपर है। पतंजलि आयुर्वेद जैसी कंपनियां धन और सत्ता-तंत्र तक पहुंच के लिहाज से प्रभावशाली मानी जाती हैं। ऐसे में अगर उसके अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनादर किया, तो उसे आज के व्यापक संदर्भ में रखकर ही देखा जाएगा। उस संदर्भ में जिसमें रसूखदार लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top