Breaking News
गैरसैंण विधानसभा सत्र कुछ ही घंटों में स्थगित करना जनता के पैसे की बर्बादी: गणेश गोदियाल
गैरसैंण विधानसभा सत्र कुछ ही घंटों में स्थगित करना जनता के पैसे की बर्बादी: गणेश गोदियाल
पशु हेल्पलाइन 1962 पर रिस्पॉन्स नहीं मिलने से डीएम नाराज, संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश
पशु हेल्पलाइन 1962 पर रिस्पॉन्स नहीं मिलने से डीएम नाराज, संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश
आपदा प्रभावित क्षेत्र मसंदावाला के लिए जारी हुए 43 लाख, ग्रामीणों ने जताया मंत्री गणेश जोशी का आभार
आपदा प्रभावित क्षेत्र मसंदावाला के लिए जारी हुए 43 लाख, ग्रामीणों ने जताया मंत्री गणेश जोशी का आभार
देहरादून में जाम से मिलेगी निजात? डीएम ने तैयार करने के दिए मास्टर प्लान के निर्देश
देहरादून में जाम से मिलेगी निजात? डीएम ने तैयार करने के दिए मास्टर प्लान के निर्देश
गैरसैंण में दो विधानसभा सत्र आयोजित करना सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक: सीएम धामी
गैरसैंण में दो विधानसभा सत्र आयोजित करना सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक: सीएम धामी
नैनीताल में पर्यटन स्वरोजगार और होमस्टे योजनाओं को बढ़ावा, 31 आवेदन स्वीकृत
नैनीताल में पर्यटन स्वरोजगार और होमस्टे योजनाओं को बढ़ावा, 31 आवेदन स्वीकृत
हल्द्वानी में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर डीएम ने किसानों से की अपील
हल्द्वानी में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर डीएम ने किसानों से की अपील
श्रीनगर से सड़क मार्ग से देहरादून लौटते हुए मुख्यमंत्री धामी ने किया राष्ट्रीय राजमार्ग का स्थलीय निरीक्षण
श्रीनगर से सड़क मार्ग से देहरादून लौटते हुए मुख्यमंत्री धामी ने किया राष्ट्रीय राजमार्ग का स्थलीय निरीक्षण
सरकार ने अनुपूरक बजट में हर वर्ग के कल्याण पर फ़ोकस किया है: महाराज
सरकार ने अनुपूरक बजट में हर वर्ग के कल्याण पर फ़ोकस किया है: महाराज

अंबानी-अडानी, खरबपतियों का चंदा कहां?

अंबानी-अडानी, खरबपतियों का चंदा कहां?

हरिशंकर व्यास
कैसी हैरानी की बात है कि मोदी राज में सबसे ज्यादा धंधा खरबपतियों का बढ़ा। अडानी जगत सेठ हुआ। अंबानी कुबेरपति हुआ। पैसे से भारत की संस्कृति का ढिंढोरा करता है। इनके साथ टाटा, बिड़ला सहित टॉप के बीस खरबपति दिन-दुनी, रात-चौगुनी की रफ्तार से भारत के लोगों से पैसा कमाते हुए हैं लेकिन वे इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीददारों की लिस्ट से लगभग गायब। यों कुछ जानकार शेल याकि खोखा कंपनियों से बॉन्डस लेन-देन की बारीकी तलाश रहे हैं। लेकिन मोटा मोटी मोदी सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड योजना में जुआरियों, सटोरियों, काला बाजारियों और ठेकेदारों से ही चुनाव और राजनीति के नाम पर वसूली हुई दिखती है। और यह हैरानी की बात है।

तभी अपना सवाल है कि सरकारी प्रोजेक्टों और मुंबई, दिल्ली आदि महानगरों के ठेकेदारों, बिल्डरों की इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदने-देने के साथ सौदेबाजी का यदि सीक्वेंस है तो भला विनिवेश, खान आवंटन से लेकर अंतरराष्ट्रीय सौदों, खरीद-फरोख्त के खरबपतियों के कारोबार की वसूली का क्या रूप है? जब चिंदीमार, खोखा कंपनियों को ईडी, सीबीआई, आईटी से लाइन हाजिर करा वसूली हुई है तो खरबपतियों के लेवल का चंदा कहां गया? क्या इस रीति-नीति पर चला गया कि छोटे कारोबारी भाजपा पार्टी के लिए और वैश्विक खरबपति किसी और काम के लिए?

भला और क्या काम हो सकता है? आप ही अनुमान लगाएं। लुटियन दिल्ली में जितने मुंह उतनी बात है। मगर इतना तय है कि भारत के टॉप सौ अरबपतियों की कंपनियों में बिना इलेक्टोरल बॉन्ड्स के कई नाम निकल आएंगे। और फिर यदि इनकों नौ वर्षों में मिली सरकारी कंपनियों, विनिवेश, लाइसेंसों की पूरी सूची के साथ तुलना करें तो वह क्या आंख खोल देने वाली नहीं होगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top